Tuesday, 18 August 2020

हर साल औसतन 80 पायलट दे रहे भारतीय वायुसेना से इस्तीफा, ये है वजह

नई दिल्ली, 18 अगस्त 2020


YASH KUMAR SONI @reporteryash5


IAF को पायलटों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. 1 फरवरी, 2018 को, सरकार ने राज्य सभा को सूचित किया कि भारतीय वायुसेना के पास 4,851 की स्वीकृत शक्ति के मुकाबले 3,855 पायलट ही थे.

भारतीय वायुसेना से पायलट दे रहे हैं इस्तीफा
  • 2018 में ही वायुसेना 376 पायलटों की कमी का सामना कर रही थी
  • 2016 में 100 पायलटों और 2017 में 114 ने भारतीय वायुसेना छोड़ी
  • बीते दस साल में भारतीय वायुसेना (IAF) के 798 पायलटों ने इस्तीफा दिया है. ये चौंकाने वाला खुलासा खुद भारतीय वायुसेना ने उस सूचना के अधिकार (RTI) वाली याचिका के जवाब में किया है जो इंडिया टुडे की ओर से दाखिल की गई.

  • IAF को पायलटों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. 1 फरवरी, 2018 को, सरकार ने राज्य सभा को सूचित किया कि भारतीय वायुसेना के पास 4,851 की स्वीकृत शक्ति के मुकाबले 3,855 पायलट ही थे. इसलिए 2018 में ही वायुसेना 376 पायलटों की कमी का सामना कर रहा था. ये स्थिति IAF की तैयारियों के अनुकूल नहीं है.

  • 2016 में 100 पायलटों और 2017 में 114 ने भारतीय वायुसेना को छोड़ा. वहीं 2015 में 37 पायलटों ने सेवानिवृत्ति से पहले इस्तीफा दिया. 2015 वो साल रहा जिसमें बीते एक दशक के किसी भी साल की तुलना में सबसे कम पायलट भारतीय वायुसेना से अलग हुए. नहीं तो हर साल औसतन 80 पायलट इस्तीफे दे रहे हैं.

  • ‘सेवानिवृत्ति से पहले वायुसेना छोड़ने वालों में से कितने पायलट प्राइवेट एयरलाइंस में शामिल हुए?’ इस सवाल के जवाब में डायरेक्ट्रेट ऑफ पर्सनल सर्विस, एयर हेड क्वार्टर ने कहा, 'प्राइवेट एयरलाइन में शामिल होने वाले अधिकारियों के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती, क्योंकि ऐसा कोई डेटा नहीं रखा जाता है. यह सार्वजनिक प्राधिकरण निजी एयरलाइन्स से जुड़ने के लिए एनओसी प्रदान करता है. रिकॉर्ड के मुताबिक संख्या इस प्रकार हैं-'

  • outlook-rdhxjkxe_081820085222.pngIAF पायलट एक महीने में करीब 2 लाख कमाता है
  • यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि इस्तीफा देने वाले 798 पायलटों में से 289, को प्राइवेट एयरलाइंस की फ्लाइट्स के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट मिला. इसके सीधे मायने हैं बीते एक दशक में वायु सेना छोड़ने वाले पायलटों में से एक तिहाई से अधिक संभवत: कॉमर्शियल फ्लाइट्स उड़ा रहे हैं.

  • समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, एक मध्य स्तर का IAF पायलट एक महीने में करीब 2 लाख कमाता है लेकिन जब वह एक प्राइवेट एयरलाइंस में शामिल होता है तो उसकी आय चार गुना तक बढ़ सकती है. अधिकतर IAF पायलट 20 साल की सेवा पूरी करने के बाद वायुसेना छोड़ देते हैं, इससे वो पेंशन के हकदार रहते हैं.


  • हमने यह भी पूछा था कि 'भारतीय वायुसेना ने पायलटों के सेवा छोड़ने और प्राइवेट एयरलाइंस में शामिल होने से रोकने के लिए कोई नीति बनाई है या उस दिशा में काम कर रही है' तो जवाब में IAF ने कहा कि ऐसी कोई योजना या नीतियां मौजूद नहीं हैं.


दिल्ली: हंगर रिलीफ कैंप जारी रखने की मांग, हाईकोर्ट ने लीगल अथॉरिटी से मांगी रिपोर्ट

 नई दिल्ली, 18 अगस्त 2020,

YASH KUMAR SONI @reporteryash5

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह आदेश रोजी-रोटी अधिकार अभियान एनजीओ की तरफ से दाखिल की गई याचिका पर दिया है. इस याचिका में इन हंगर रिलीफ कैंप को आगे बढ़ाने की कोर्ट से दरखास्त की गई है.

दिल्ली हाईकोर्ट
  • रोजी-रोटी अधिकार अभियान एनजीओ ने हाईकोर्ट में दाखिल की थी याचिका
  • हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया था कि सभी को खाना पहुंचाया जाए
  • कोरोना काल में बेघर लोगों को खाने-पीने से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था. ऐसे लोगों की मदद करने के लिए दिल्ली सरकार ने हंगर रिलीफ कैंप शुरू किए थे. दिल्ली में ये स्कीम मुख्यमंत्री कोरोना सहायता योजना नाम से शुरू की गई थी. लेकिन महीनों बीतने के बाद क्या अब इन हंगर रिलीफ कैंप की जरूरत है? इसको लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी को एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने यह आदेश रोजी-रोटी अधिकार अभियान एनजीओ की तरफ से दाखिल की गई याचिका पर दिया है. इस याचिका में इन हंगर रिलीफ कैंप को आगे बढ़ाने की कोर्ट से दरखास्त की गई है. हाईकोर्ट में दिल्ली स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी से कहा है कि कोर्ट में दाखिल की जाने वाली स्टेटस रिपोर्ट में वह यह भी बताएं कि दिल्ली अर्बन शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड के आधीन चलने वाले नाइट शेल्टर होम में क्या फिलहाल तैयार किए गए खाने को दिए जाने की जरूरत है? कोर्ट ने कहा है कि अथॉरिटी अपना एक सर्वे करें और जमीनी हकीकत का पता लगाते हुए कोर्ट को अपनी रिपोर्ट दें.

  • दिल्ली लीगल सर्विस अथॉरिटी को देनी है स्टेटस रिपोर्ट
  • रोजी-रोटी अधिकार अभियान एनजीओ की तरफ से कई महीने पहले ही कोरोना के संक्रमण को देखते हुए सभी जरूरतमंदों को खाना और सूखा राशन दिए जाने की गुहार लगाई गई थी. जिसके बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया था कि किसी भी व्यक्ति के पास राशन कार्ड हो या ना हो, लेकिन हर जरूरतमंद तक राशन और भोजन पहुंचाया जाए. लेकिन लॉकडाउन के खुलने के बाद एनजीओ की तरफ से अब फिर एक अर्जी लगाई गई है जिसमें हर जरूरतमंद को राशन और भोजन देने की कोर्ट से गुहार लगाई गई है.

  • हालांकि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एनजीओ के पास यह डाटा नहीं था कि दिल्ली में अभी भी कितने लोग ऐसे हैं जिनको फ्री राशन और भोजन की जरूरत है और जिनके पास राशन कार्ड नहीं है. हाईकोर्ट ने एनजीओ को इससे जुड़ी संख्या बताने के लिए भी निर्देश दिए हैं, जिससे यह साफ हो सके कि दिल्ली में कितनी बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जिन्हें अभी राशन या भोजन दिए जाने की जरूरत है.


  • कोरोना के मद्देनजर दिल्ली सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों को राशन और खाने-पीने की सुविधा मुहैया कराई गई थी लेकिन दिल्ली लीगल सर्विस अथॉरिटी को अपनी स्टेटस रिपोर्ट में यह बताना है कि हंगर कैंप आगे भी जारी रखने की दिल्ली में जरूरत है या नहीं.

Monday, 17 August 2020

नहीं होगा आयकर रिटर्न फॉर्म में बदलाव, आयकर विभाग ज्यादा खर्च करने वालों का लगा लेगा पता

 नई दिल्ली, 17 अगस्त 2020

YASH_KUMAR_SONI

 @reporteryash5

आयकर विभाग के सूत्रों का कहना है कि सरकार आईटीआर फार्म में किसी तरह का संशोधन करने पर विचार नहीं कर रही है. आयकर विभाग को उच्च मूल्य के लेनदेन की जानकारी दूसरे स्रोतों से मिल जाएगी.

ITR फॉर्म में नहीं होगा बदलाव    
  • ITR फॉर्म में बदलाव की आईं थी खबरें
  • आयकर विभाग के सूत्रों ने किया इनका खंडन
  • करदाताओं को अपने आयकर रिटर्न (ITR) में हाई वैल्यू के लेनदेन का ब्यौरा देने के बारे में सरकार आईटीआर फार्म में किसी तरह का संशोधन करने पर विचार नहीं कर रही है. सूत्रों ने यह जानकारी दी है. आयकर विभाग को दूसरे स्रोतों से ऐसे लेनदेन की जानकारी मिल जाएगी.

  • क्या है मामला

  • वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने आजतक-इंडिया टुडे को बताया कि इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म में बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है. सूत्रों ने बताया कि वित्तीय लेनदेन के बयान (एसएफटी) के तहत किसी भी जानकारी के विस्तार का मतलब यह होगा कि आयकर विभाग को ऐसे उच्च मूल्य के लेनदेन की जानकारी वित्तीय संस्थानों द्वारा दी जाएगी. सूत्रों ने कहा, ‘आयकर रिटर्न फॉर्म को संशोधित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है. करदाता को खुद अपने रिटर्न में उच्च मूल्य वाले लेनदेन का ब्यौरा देने की जरूरत नहीं होगी.'

  • बहुत से ऐसे टैक्सपेयर्स होते हैं जो अपनी आमदनी सालाना 2.5 लाख से भी कम दिखाते हैं, लेकिन वे बिजनेस क्लास से ट्रैवल करते हैं, विदेश यात्रा पर जाते हैं और उनके बच्चे महंगे स्कूलों में पढ़ते हैं. ऐसे लोगों के बारे में आयकर विभाग को जानकारी थर्ड पार्टी यानी इनसे जुड़े संस्थानों से मिल जाती है. ऐसे बड़े लेनदेन के लिए इसीलिए पैन या आधार संख्या दर्ज करने की व्यवस्था की गई है.

  • क्या थीं खबरें

    गौरतलब है कि इसके पहले मीडिया में ऐसी खबरें आईं थीं कि टैक्स बेस यानी करदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए आयकर विभाग जानकारी देने लायक वित्तीय लेनदेन की सूची का विस्तार करने की तैयारी कर रहा है. यानी ऐसे लेनदेन जिनकी जानकारी लोगों को अपने आय​कर रिटर्न के द्वारा आयकर विभाग को फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन स्टेटमेंट (SFT) के तहत देनी होती है.

    खबर में कहा गया था कि अब 20,000 रुपये से ऊपर के होटल के भुगतान, 50,000 रुपये से ज्यादा बीमा प्रीमियम और 20,000 से ज्यादा हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके अलावा, 1 लाख रुपये से ज्यादा सालाना कॉलेज फीस, विदेश यात्रा, घरेलू बिजनेस क्लास एयर ट्रैवल, व्हाइट गुड्स की खरीद, 1 लाख रुपये से ज्यादा कीमत की ज्वैलरी या पेंटिंग, डीमैट अकाउंट और बैंक लॉकर आदि को फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन स्टेटमेंट की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव है.


    कहा गया कि टैक्सपेयर्स को स्वैच्छिक तरीके से इसकी जानकारी देनी होगी और यह जानकारी लोगों के फॉर्म 26AS में दिखेगी. लेकिन अब आयकर विभाग ने कहा कि ऐसी जानकारी उसे वित्तीय संस्थानों से मिल जाएगी और इसके लिए इनकम टैक्स रिटर्न के फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.

     

    भारत को आंख दिखाने के लिए चीन ने कई सालों में पहली बार उठाया ये कदम

    17 अगस्त 202

    YASH_KUMAR_SONI

    @reporteryash5


     भारत से चल रहे सीमा तनाव के बीच चीन के विदेश मंत्री ने तिब्बत का दौरा कर हैरान कर दिया है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने शुक्रवार को तिब्बत का दौरा किया जिसमें भारत से विवादित सीमाई इलाके भी शामिल हैं. कहा जा रहा है कि इस दौरे के जरिए चीन ने भारत को कड़ा संदेश देने की कोशिश की है.

         भारत को आंख दिखाने के लिए चीन ने कई सालों में पहली बार उठाया ये कदम
     के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को जो बयान जारी किया, उसमें भारत का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया गया. हालांकि, वांग यी के तिब्बत दौरे को आम दौरा तो बिल्कुल नहीं माना जा रहा है. पिछले कुछ सालों में चीन के किसी सीनियर अफसर ने तिब्बत का दौरा नहीं किया है.

    भारत को आंख दिखाने के लिए चीन ने कई सालों में पहली बार उठाया ये कदम

     पांच दौर की सैन्य वार्ता के बावजूद भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सुलझा नहीं है. विवाद सुलझने के बजाय ये लड़ाई अब व्यापार, तकनीक, निवेश और रणनीति के क्षेत्र तक पहुंच गई है. चीन का ये दौरा भी उसकी भारत को घेरने की रणनीति का ही हिस्सा बताया जा रहा है.

    भारत को आंख दिखाने के लिए चीन ने कई सालों में पहली बार उठाया ये कदम

         तिब्बत में मानवाधिकार उल्लंघन की आलोचना को खारिज करते हुए वांग ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल में तिब्बत की उपलब्धियों को गिनाया. वांग ने सीमाई मूलभूत ढांचा, गरीबी हटाने समेत कई पहलों का जिक्र किया और कहा कि तिब्बत ने पड़ोसी देशों से अच्छे आर्थिक संबंधों में अहम भूमिका निभाई है. वांग ने शी जिनपिंग की विदेश नीति और महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का भी जिक्र किया.


    चीन को ये भी डर सताता रहता है कि कहीं भारत की मदद पाकर तिब्बत में अलगाववाद की भावनाएं मजबूत ना हो जाएं. हाल ही में चीनी मीडिया में भी इसे लेकर एक संपादकीय लेख छपा था जिसमें तिब्बत को आंतरिक मुद्दा बताते हुए भारत को इससे दूर रहने की सलाह दी गई थीभारत को आंख दिखाने के लिए चीन ने कई सालों में पहली बार उठाया ये कदम.

    नानजियांग यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंटिस्ट गु सू ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि चीनी विदेश मंत्री का तिब्बत दौरा काफी चौंकाने वाला है, सामान्यत: इस तरह के दौरे तभी हुए हैं जब तिब्बत को लेकर राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता मिली हो. वांग ने तिब्बत का आखिरी दौरा पांच साल पहले किया था जब शी जिनपिंग ने तिब्बत को लेकर एक बैठक की अध्यक्षता की थी. सीमाई इलाकों में दौरा करके वांग ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय जगत को ये संदेश दे दिया कि चीन विवादित सीमाई इलाकों में अपनी संप्रुभता को लेकर आक्रामक रहेगा.भारत को आंख दिखाने के लिए चीन ने कई सालों में पहली बार उठाया ये कदम

    शंघाई म्युनिसिपल सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज में भारत से जुड़े मामलों के जानकार वांग देहुआ ने कहा कि चीन ने ये कदम इसलिए उठाया है क्योंकि वो नहीं चाहता है कि भारत के सामने कमजोर नजर आए. गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से मोदी सरकार ने चीनी फर्मों को ध्यान में रखते हुए कई आर्थिक प्रतिबंध लागू किए हैं. भारत ने 59 चीनी ऐप बैन करने समेत चीनी और पड़ोसी देशों के लिए निवेश के नियमों को भी सख्त कर दिया है. इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हिंद-प्रशांत रणनीति को अपनाते हुए हथियार खरीद और सैन्य साजो-सामान भी बढ़ा रहा है.





    Thursday, 13 August 2020

    PoK से डॉक्टर की डिग्री लेने वाले भारत में नहीं कर सकते प्रैक्टिस: MCI

     

    एमसीआई ने कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में किसी भी मेडिकल इंस्टीट्यूट को भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956 के तहत अनुमति और मान्यता की जरूरत है.

    सांकेतिक तस्वीर

    मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने एक सर्कुलर जारी कर वैसे लोगों को भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने पर रोक लगा दी है जिनके पास पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर और लद्दाख (पीओजेकेएल) की डिग्री है.

    एमसीआई की ओर से जारी एक पब्लिक नोटिस में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख का पूरा संघ शासित क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है. इसके कुछ हिस्से पर पाकिस्तान ने अवैध और जबरन कब्जा जमाया है. लिहाजा, पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर और लद्दाख के किसी भी मेडिकल इंस्टीट्यूट को आईएमसी एक्ट, 1956 के तहत अनुमति लेनी होगी. पीओजेकेएल में किसी भी मेडिकल कॉलेज को ऐसी अनुमति नहीं दी गई है. केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी एक ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी.

    एमसीआई ने पब्लिक नोटिस में लिखा है, इसे देखते हुए अवैध कब्जे वाले इस इलाके में मेडिकल कॉलेज से प्राप्त डिग्री मान्य नहीं है और ऐसे लोगों को भारत में रजिस्ट्रेशन की इजाजत नहीं दी जाएगी. एमसीआई ने कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में किसी भी मेडिकल इंस्टीट्यूट को भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956 के तहत अनुमति और मान्यता की जरूरत है.

    180 KM की स्पीड, स्लाइडिंग डोर, लेट पर हर्जाना, जानें- देश में कैसे चलेंगी प्राइवेट ट्रेनें









     @reporteryash5      

    Indian Railways, News High Speed Private Trains Features Private Trains Specifications: प्राइवेट कंपनियों द्वारा चलाई जाने वाली ट्रेनों में मेट्रो ट्रेनों या वंदे भारत एक्सप्रेस जैसे कई अत्याधुनिक फीचर्स हो सकते हैं. इनमें इलेक्ट्रॉनिक स्लाइडिंग दरवाजे, डबल ग्लेज्ड सेफ्टी ग्लास के साथ खिड़कियां, पैसेंजर सर्विलांस सिस्टम और सूचना एवं गंतव्य बोर्ड की जानकारी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी. आइए जानते हैं कैसी होंगी भारत में चलने वाली प्राइवेट ट्रेनें.

    News High Speed Private Trains Features Private Trains Specifications

    प्राइवेट कंपनियों द्वारा चलाई जाने वाली ट्रेनों में मेट्रो ट्रेनों या वंदे भारत एक्सप्रेस जैसे कई अत्याधुनिक फीचर्स हो सकते हैं. इनमें इलेक्ट्रॉनिक स्लाइडिंग दरवाजे, डबल ग्लेज्ड सेफ्टी ग्लास के साथ खिड़कियां, पैसेंजर सर्विलांस सिस्टम और सूचना एवं गंतव्य बोर्ड की जानकारी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी. इसके अलावा आपातकालीन टॉक-बैक सिस्टम भी लगा होगा जिसकी मदद से यात्री आपात स्थिति में संबंधित रेल कर्मचारी से तुरंत मदद मांग सकेंगे.

    बुधवार को रेलवे (Indian Railways) ने निजी कंपनियों के सामने अपने रेलवे नेटवर्क पर प्राइवेट ट्रेनों (High Speed Private Trains) को दौड़ाने के लिए इन शर्तों को रखा है. ये सभी शर्तें विश्वस्तरीय मानक माने जाते हैं. रेल मंत्रालय ने अपने इस मसौदे में मार्च 2023 से चरणबद्ध तरीके से 506 मार्गों पर चलाई जाने वाली प्राइवेट ट्रेनों के लिए प्रारूप और निर्देश को शामिल किया है. प्रत्येक ट्रेन में कम से कम 16 डिब्बे होंगे.

    क्या होगी रफ्तार?

    रेलवे द्वारा बुधवार को जारी किए गए प्रारूप के मसौदे में कहा गया है कि इन ट्रेनों का डिजाइन इस प्रकार होगा कि ये अधिकतम 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी. इन ट्रेनों में दोनों सिरों पर ड्राइविंग कैब होंगे और इनकी बनावट दोनों ओर से एक जैसी ही होगी जिससे किसी भी स्थिति में दोनों तरफ से यानी दोनों दिशाओं में ट्रेन को चलाने में दिक्कत न हो. इनकी बनावट ऐसी हो कि इन्हें कम से कम 35 साल तक चलाया जा सकेtrain_081320104806.jpg


    . 1,250 मीटर में खड़ी हो जाएगी चलती ट्रेन

    इस मसौदे में यह भी कहा गया है कि निजी कंपनियों को ट्रेनों को इस तरीके से तैयार करना होगा कि वो 140 सेकंड में 0 किमी प्रति घंटे से 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तर तक पहुंचने में सक्षम हों, ट्रेनों की औसत रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा रहे. इसके अलावा ट्रेनों का डिजाइन इस तरह होना चाहिए कि इमरजेंसी में ब्रेक लगाने पर यात्रा के दौरान 160 किलोमीटर की रफ्तार से चल रही ट्रेन 1,250 मीटर से कम की दूरी में स्थिर खड़ी हो जाए यानी रुक जाए.tejas-express-696x392_081320092553.jpg

    सेफ्टी का ध्यान

    रेलवे के इस नए मसौदे के अनुसार हर डिब्बे में बिजली से चलने वाले स्लाइडिंग दरवाजे कम से कम 4 होने चाहिए. ये दरवाजे दोनों तरफ दो-दो की संख्या में होंगे. ट्रेनें इन दरवाजों के पूर्ण रूप से बंद होनें के बाद ही प्रस्थान करेगी. एक भी दरवाजा खुला रहा तो ट्रेन नहीं चलेगी. यह शर्त यात्रियों की सेफ्टी के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है. साथ ही इसमें इमरजेंसी के वक्त दरवाजे को मैन्युअली खोलने की सुविधा भी होगी.

    कोच में जीरो डिस्चार्ज टॉयलेट सिस्टम होगा. साथ ही ट्रेनों को बाहरी शोर-गुल से पूरी तरह मुक्त रखने की शर्त भी रखी गई है. साथ ही यात्रा के दौरान कंपन न हो, दरवाजों के पास इमरजेंसी बटन हो जिससे यात्री जरूरत पड़ने पर सीधे रेल कर्मचारियों से बात कर सकें, ट्रेन में आने वाले स्टेशन और अन्य सभी जरूरी जानकारी डिस्प्ले पर दी जानी चाहिए. ये जानकारी हिन्दी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में हो.


     लगे होंगे सर्विलांस कैमरे

    इसके अलावा इन ट्रेनों में सीसीटीवी नेटवर्क, सर्विलांस कैमरे, वाइस रिकॉर्डिग जैसी सुविधाओं की बात भी कही गई है. प्राइवेट ट्रेनों के लिए रेलवे ने इन सभी विशेषताओं को निजी ऑपरेटरों से रेलवे सिस्टम में शामिल करने की मांग की है.

    23 कंपनियों ने दिखाई रुचि

    रेलवे द्वारा जारी प्राईवेट ट्रेनों के टेंडर में जीएमआर, सीएएफ इंडिया, एल्सटॉम, बांबबार्डियर, सीमंस, आईआरसीटीसी, मेधा, भेल, सीएएफ, स्टरलाइट, भारत फोर्ज, जेकेबी इंफ्रास्ट्रक्चर और बीएचईएल जैसी जीएमआर पीएसयू की बड़ी कंपनियों समेत 23 कंपनियों ने रुचि दिखाई है.

    भारत में 151 प्राइवेट ट्रेनों को पटरी पर दौड़ाने के लिए प्राइवेट कंपनियों से आवेदन मांगे हैं. इसके तहत प्राइवेट ट्रेनों को 109 रूटों पर चलाया जा सकता है. इसके लिए प्राइवेट कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपये का इनवेस्टमेंट करना होगा.


    राम जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को कोरोना, मेदांता में होंगे भर्ती

    @reporteryash5

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्र्स्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास कोरोना संक्रमित मिले हैं. नृत्य गोपाल दास को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. इसके बाद उनका कोरोना टेस्ट किया गया था.

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्र्स्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. नृत्य गोपाल दास को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. इसके बाद उनका कोरोना टेस्ट कराया गया था. उन्हें ऑक्सीजन लगाया गया है.

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्र्स्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास कोरोना संक्रमित मिले हैं. नृत्य गोपाल दास को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. इसके बाद उनका कोरोना टेस्ट किया गया था.

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्र्स्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास

    इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत नृत्य गोपाल दास, उनके समर्थकों और मथुरा के जिलाधिकारी से बात की है. इसके साथ ही सीएम योगी ने मेदांता हॉस्पिटल के डॉक्टर नरेश त्रेहन से बात की है और महंत नृत्य गोपाल दास को गुरुग्राम स्थित मेदांता हॉस्पिटल में शिफ्ट करने की तैयारी है.

    मथुरा में हैं नृत्य गोपाल दास

    गौरतलब है कि नृत्य गोपाल दास हर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दौरान मथुरा आते हैं. मथुरा यात्रा के दौरान आज उनकी तबीयत बिगड़ गई. उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. इसके बाद उनका कोरोना टेस्ट किया गया. उनका कोरोना रिजल्ट पॉजिटिव आ गया है.

    गौरतलब है कि पिछले दिनों ही अयोध्या में रामलला के दो पुजारी कोरोना संक्रमित मिले थे. इसके अलावा कई पुलिसकर्मी भी कोरोना पॉजिटिव मिले थे. कोरोना संकट को देखते हुए राम जन्मभूमि मंदिर के भूमिपूजन के कार्यक्रम में खास इंतजाम किए गए थे. मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया था.

    हर साल औसतन 80 पायलट दे रहे भारतीय वायुसेना से इस्तीफा, ये है वजह

    नई दिल्ली, 18 अगस्त 2020 YASH KUMAR SONI @reporteryash5 IAF को पायलटों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. 1 फरवरी, 2018 को, सरकार ने राज्...